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*स्टेनलेस स्टील के टैंकरो से म्योरपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायतो मे होगी पेयजल आपुर्ति, सहायक विकास अधिकारी(पंचायत) म्योरपुर ने ग्राम सचिवो को जारी किया निर्देश।

* सोनभद्र मे व्याप्त भयावह प्रदुषण के मुद्दे पर एनजीटी द्वारा गठित ओवर साईट कमेटी के समक्ष सामाजिक कार्यकर्ता पंकज मिश्रा ने उठाया था स्टेनलेस स्टील टैंकरो के माध्यम से पेयजल आपुर्ति का मुद्दा व स्टेनलेस स्टील टैंकरो के माध्यम से पेयजल आपुर्ति हेतु कमेटी ने दिया था निर्देश।

* आयरन टैंक के माध्यम से होने वाली पेयजल आपुर्ति से टैंकर जल्द खराब हो जाते है तथा आपुर्ति की जाने वाली पेयजल कि गुणवत्ता होती है प्रभावित।
सोनभद्र मे व्याप्त भयावह प्रदुषण के मुद्दे पर एनजीटी द्वारा गठित ओवरसाईट कमेटी के ग्राम पंचायतो मे स्टेनलेस स्टील के टैंकरो के माध्यम से पेजयल आपुर्ति के निर्देश के अनुपालन मे सहायक विकास अधिकारी(पंचायत) म्योरपुर ने ग्राम सचिवो को निर्देश जारी किया है कि स्टेनलेस स्टील के टैंकरो का क्रय कर ग्राम पंचायतो मे शुध्द पेयजल आपुर्ति की जाये। एनजीटी द्वारा गठित ओवर साईट कमेटी के चैयरमैन की अध्यक्षता मे कलेक्ट्रेट सभागार मे हुई बैठक मे सामाजिक कार्यकर्ता पंकज मिश्रा ने ग्राम पंचायतो मे आयरन टैंक से होने वाले पेयजल आपुर्ति को ग्रामीणो के स्वास्थ्य के लिये हानिकारक बताते हुये समस्त परियोजनाओ व पंचायतो को स्टेनलेस स्टील के टैंकरो के माध्यम से शुध्द पेयजल आपुर्ति हेतु निर्देशित किया जाने की मांग की थी जिस पर तत्समय ही चैयरमैन ओवरसाईट कमेटी ने तत्काल जिलाधिकारी-सोनभद्र व परियोजनाओ के प्रतिनिधियो को निर्देशित किया था जिसके क्रम मे पंकज मिश्रा द्वारा जिलाधिकारी-सोनभद्र को पत्र लिखकर ग्राम पंचायत सचिवो को निर्देश जारी किये जाने की मांग की गयी थी व सहायक विकास अधिकारी(पंचायत) म्योरपुर द्वारा ग्राम सचिवो को निर्देश जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतो मे प्रयुक्त होने वाले आयरन टैंक के पेयजल के सम्पर्क मे आने से जंग लग जाता है तथा टैंकर जल्द खराब हो जाते है व जंग लगे टैंकरो से पेयजल कि गुणवत्ता भी प्रभावित होती है तथा जिसका सीधा असर लोगो के स्वास्थ्य पर होता है।अगर स्टेनलेस स्टील टैंकरो के माध्यम से पेयजल आपुर्ति के आदेश का अनुपालन होता है तो नगर पंचायतो कि तर्ज पर गुणवत्ता युक्त पेयजल ग्रामीणो को मिल सकेगा।
30 साल बाद भी हर सुविधा से वंचित है .सूबे में सर्वाधिक खनिज पदार्थ ,बिजली, वन सम्पदा, उद्योग धन्धे वाले जिले की सीमायें झारखण्ड, मध्यप्रदेश , बिहार और छत्तीसगढ़ से लगती है । चिकित्सा /स्वास्थ्य, शिक्षा, विकास सभी क्षेत्रों में आज भी काफी पीछे रहने वाला सोनभद्र अपनी हालात पर आंसू बहा रहा है।

न्याय के लिए आगे आये।

*UrjanchalMangeNyay*
क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत के चौथे सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा जिला है तथा यहां का ‘सलखन फॉसिल पार्क’ दुनिया का सबसे पुराना जीवाश्म पार्क है जिसे लोग पूरी दुनिया से यहां देखने व घुमने आते हैंं।

भारत के सर्वप्रथम प्रधानमन्त्री पं ज्वाहर लाल नेहरु ने इस जिले को “भारत का स्विटजर लैण्ड” बनाने का सपना देखा था। यह जिला औद्योगिक स्वर्ग है। यहां एल्युमीनियम इकाई, रासायनिक इकाई, देश कि सबसे बड़ी डाला सिमेन्ट फैक्ट्री(800 टन प्रतिदिन), अनपरा व रिहन्द विद्युत इकाई (थर्मल व हाईड्रा), स्टोन थ्रशर इकाई, आदित्य बिड़ला केमिक्लस, एन.टी.पी.सी. इत्यादि मिलकर इस जिले को भारत का पावर हब बनाते हैं,तथा इसी दृष्टी इसे ‘मिनी मुम्बई’ भी कहा जाता है। तथा इसे एक केन्द्र शासित प्रदेश भी बनाया जा सकता है।

इन सब के बावजूद आज सोनभद्र की जनता को उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार के लिए बाहर बड़े शहरों के लिए जाना पड़ता है।

*UrjanchalMangeNyay*

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